वाचिक

जुलाई 21, 2007

किछु बात अछि

Filed under: Uncategorized — vaachik @ 8:08 पूर्वाह्न

कोना मन के थामि के जिनगीक गाड़ी चलैत रहैत छैक, तकरा बूझै में तेरह डिबिया तेल जरि जाइत छैक लोक सबहक। एकठाम रहैय वला लोक सबके देख लिय। दोस्ती जावत धरि रहलैन चारू एक सिरा सं बान्हल जकां छलाह। कनिया एलखिन्ह, सिराक बंधन खूजल जकां बुझा रहल अछि। आब एकरा की कहबै। एहि में ई बात नहि छैक जे कनिया द्वारे ई सब भ रहल अछि। कारण निश्चित रूप सं स्वतः ओ स्वप्रेरित छैक। सब के एक-दोसरा के बूझ में दिक्क बुझना जाइछ। एक टा के शिकायत छनि जे दोसर हुनक गप अथवा समस्या के तवज्जो नहि दैत छथिन। तेसर दोसर के परेशान रहला सं परेशान अछि। चारिम की करथु से ओकरा बुझेबै नहि करैत छैक। आब समस्या ई जे एहि चारू के बीच किछु सलाह-मशविरा के देत। कियैक त आन-आन के समस्याक निपटेनै के जिम्मा त एहि चारू में से कोनो एक उठबैत रहल अछि। तखन जानि-बूझि के उक्खड़ि में मुंह के देत। मात्र सोच-विचारि सकैत छी जे की कोना कयल जाय। किछु क देल जाय ताहि पर सोचै में संभवतः पुरनिमा सं अन्हरिया आबि जाय। तैं धूल फांकि के रहय में खास आपत्ति नहि। मुदा समस्या के बढ़ैत देखि के जीयैत जयनाई सेहो अति कठिन। किछु फुरायत तखन ने। एहिठाम त अखबारक मशीनी-व्यस्तता तेहेन भ चुकल अछि जे सांझक नोकरी, ब्रह्ममूहुतॆक सुतनाई, भोरे आफिस में मीटिंग, बेर में दिनका भोजन आ सांझ में फेर आफिस आदत सं बेसी दिनचरजा भ चुकल अछि।
         खैर, समस्या खतम होयबा लेल उपजैत छैक। एकरो समाधान हेबै करतै। तावत् बाट ताकि सकैत छी, तकैत रहब।

जुलाई 11, 2007

गैंगरेप ओ दुराचार

Filed under: Uncategorized — vaachik @ 7:45 पूर्वाह्न

दू दिन पूवॆ अखबार में एकटा खबरि छपल। नरसिंग होम में गैंगरेप।‌ मामला सनसनीखेज छलैक तैं खबरि के हेडिंग के पंचिंग बनयबा लेल एहि शब्दक प्रयोग कयल गेल। दोसर दिन अखबारक किछु वरिष्ठक विचार छलैन जे एहि तरह के शब्दक प्रयोग उचित नहि। तकॆ देल गेलैन जे खबरि के देखैत ई हेडिंग लगाओल गेल। मुदा ‍सरकार नहि मानलैन। अस्तु एकटा सरकुलर जारी क देल गेल जे आई सं बलात्कार संबंधी कोनो खबरि में दुराचार शब्द छोड़ि आउर कोनो शब्दक प्रयोग नहि कयल जायत। कियैक त रेप, बलात्कार अथवा गैंगरेप शब्द पाठकक मस्तिष्क पर घृणास्पद रूप सं असर करैत अछि। चूंकि अखबार पाठकक लेल होइत अछि तैं आई दिन सं एहेन कोनो खबरि के हेडिंग पर ध्यान राखल जाय।
           सरकारक बैसक में त इहो निणॆय भेल छल जे दुष्कमॆ शब्द जा सकैछ। मुदा सरकारक मंत्री लोकनि बाद में ई निणॆय कयलन्हि जे दुराचारे टा के प्रयोग कयल जायत। हम पुछलियैन्ह जे दुष्कमॆ में त आपत्ति नहि। त कहल गेल जे दुष्कमॆ कोनो बालिका यानि माइनर संग बलात्कार में प्रयोगाथॆ होइत अछि आ दुराचार वयस्कक लेल। ई सुनि हम अपन डिक्शनरी के ताक पर ध देलहुं। कारण जखन बड़का विद्वान सब हिंदी के ध्यान राखि रहल छथि तखन हमरा सनक लल्लू-पंजू के पूछैये।

अगला पृष्ठ »

WordPress.com पर ब्लॉग.