दू-तीन दिन पूवॆ कतेको रास मैथिल बंधु लोकनि दिल्ली में संसद भवन पर जमा भेलाह. काज छलन्हि मिथिला राज्य के अलग कर हेतु प्रदशॆन. आफिस में छलहुं तैं हुनकर लोकनिक फोटो आयल छल से देखलहुं. नीक लागल. बाद में खबरि सेहो आयल. पढ़ि के लागल जे बसिया तारी पिया रहल छथि. अखबारक कोनो पन्ना पर जगह यदि रहितैक त निश्चित रूपे सं खबरि छपितहुं. मुदा से नहि भेल तैं मेरठ में बैसि क मिथिला राज्य के संबंध में कोनो तरहक कोशिश करबाक एकटा छोट छिन प्रयास अपूणॆ रहि गेल.
मिथिला राज्य के ल क कोनो एहेन गप नहि अछि जे हम पूवॆ-आग्रह पोसने होय. तथापि लगति रहैत अछि जे एहि राज्य के बनबाक कोनो संभावना नहि. कियैक त राज्य बनेबा लेल जे सब सं जरूरी चीज होइत अछि राजनीति कयनाइ, से करबा में मैथिल बंधु लोकनि पाछू छथि. ओना राजनीति कखन कोन करोट फेरत तकरा बुझवा में कतेको गोटे के कइएक सदी लागि जाइत छनि. तखन इहो गप नहि जे मिथिला में राजनीति कर वला लोक नहि छथि. खूब छथि आ जमि के करैत छथि. मुदा एहि मुद्दा पर पता नहि कियैक हुनका सब के ठोर सुखा जाइत छनि. नहि मानी त एहि आंदोलन सं संबंधित कोनो बरखक वा दिनक अखबार उठा के देखि लिय, पता चलि जाइत. जहिया-जहिया मिथिला ले आंदोलन करबाक अवसर भेल गीनि के दू-चारि गोटे एकठाम जमा भ जाइत छथि, भाषण दैत छथिन कनेक काल आ मिथिला राज्यक लेल मरै-जीबै लेल समपॆण क लैत छथि. आश्चयॆ नहि जे एहि तरहें कयक साल सं मिथिला बनि के टूटि गेलीह. मुदा लोक सब ओहिना आंदोलन करैत रहि गेलाह.
मोन पाड़ू झारखंड आंदोलन. कतेको राजनीतिक दांव-पेंच आ बलिदान (तथाकथित सही) द क अंततः झारखंड बनि गेल. लालू यादवक विरोध पटना में रहि गेलैन आ रांची राजधानी भ गेल. एहिना छत्तीसगढ़ ओ उत्तरांचल, आब उत्तराखंड के भेल. तात्पयॆ ई जे पहाड़ सं ल क आदिवासी क्षेत्रक लोक लड़ि सकैत अछि, मुदा हम मैदानी भाग वला सब ओहिना रहि गेलहुं. दुखी होयबाक गप नहि जे अपना सब लड़लहुं नहि. अपन सब के शोणित में लड़ैक माद्दा नहि अछि, ई विशेषता छी. लेकिन आब समय आबि गेल छैक जखन कि एकरा तरुआरि सं टघरै वला शोणित बना लेबाक चाही. कि हम किछु गलत कहलहुं…….